आदिवासी समुदाय खतरे में, सरदार सरोवर बांध को 135 मीटर तक भरने की जिद छोड़े गुजरात

[via Naidunia] भोपाल। प्रदेश में नर्मदा के किनारे बसे हजारों आदिवासी परिवारों को बचाना है तो सरदार सरोवर बांध को 135 मीटर तक भरने की जिद छोड़नी होगी। अभी चौबीसों घंटे हजारों परिवार डूब में जाने के खतरे से जूझ रहे हैं और बारिश में यहां-वहां ठिकाना खोज रहे हैं। इन आदिवासी परिवारों को राहत देने के लिए केंद्र व गुजरात सरकार को बांध का जल स्तर 122 मीटर करना होगा।

यूनिवर्सिटी नेटवर्क फॉर हृयूमन राइट्स द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मंगलवार को यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रुहान नागरा ने इस रिपोर्ट को मीडिया के सामने सार्वजनिक किया। रिपोर्ट मप्र में नर्मदा के किनारे बसे डूब प्रभावित आदिवासी समुदाय के विभिन्न पहलुओं को लेकर तैयार की है। यह यूनिवर्सिटी अमेरिका में है।

राजधानी में पत्रकारों से चर्चा में रुहान नागरा ने कहा कि सरदार सरोवर बांध परियोजना का व्यापक विपरीत असर देखा जा रहा है जो मानव अधिकारों का उल्लंघन है। ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकारों के खिलाफ है।

विस्थापन में गड़बड़ी की

रिपोर्ट में विस्थापन में गड़बड़ी के भी आरोप लगाए हैं। कहा गया है कि सैकड़ों आदिवासी परिवारों का नाम छोड़ दिया गया है। ऐसे परिवार परेशान हैं।

संयुक्त परिवार टूट गए

रिपोर्ट में कहा गया है कि बांध को 135 मीटर तक भरने की जिद के चलते कई परिवारों को पैतृक जमीन से बेघर होना पड़ा है। दूसरी जगह जमीनों के दाम बहुत अधिक है। इसके कारण संयुक्त परिवारों को अलग-अलग रहना पड़ रहा है। परियोजना ने संयुक्त परिवारों को तोड़ने का काम किया है।

Ruhan Nagra